समुद्री मार्गों की खोज का अमानवीय पहलू क्या था । Samudri margon ki Khoj ka manviy pahlu kya tha

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नमस्कार दोस्तों आज के इस आर्टिकल में आपका स्वागत है। इस पोस्ट में बिहार बोर्ड कक्षा 11 के इतिहास विषय के सितंबर 2024 के मंथली एग्जाम में पूछा गया अति महत्वपूर्ण प्रश्न “समुद्री मार्गों की खोज का अमानवीय पहलू क्या था”(Samudri margon ki Khoj ka manviy pahlu kya tha”का उत्तर दिया गया है। इस पोस्ट में इस प्रश्न के तीन से चार उतर दिए गए हैं। और तीनों उत्तर बिल्कुल सही है। आप इन तीनों उत्तरों में से किसी भी उत्तर को अपने एग्जाम में लिख सकते हैं।

समुद्री मार्गों की खोज का अमानवीय पहलू क्या था । Samudri margon ki Khoj ka manviy pahlu kya tha

Q: समुद्री गायों की खोज का अमानवीय पहलू क्या था । Samudri gayon ki Khoj ka manviy pahlu kya tha

Answer – 

समुद्री गार्यों की खोज का अमानवीय पहलू यह था कि इस दौरान आदिवासियों और स्थानीय जनजातियों का शोषण किया गया, उनकी भूमि पर कब्जा किया गया और उन्हें बहुत ही कठिन हालात में छोड़ दिया गया।

आज के पेपर में पूछे गए प्रश्न

Q. समुद्री मार्गों की खोज का अमानवीय पहलू क्या था

Q. अमरीका में बागान-प्रथा लागू होने से किस प्रकार दास व्यापार को बढ़ावा मिला

Q. एजटेक सभ्यता की दो प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख करें

Q. इंका सभ्यता का विनाश किसने और किस प्रकार किया

Q. कुस्तुनतुनिया का पतन कब हुआ इसका क्या परिणाम हुआ

Q. इंका सभ्यता का आरम्भ कब एवं कहाँ हुआ था

Q. 15वीं शताब्दी में समुद्री मार्ग की खोज के कारणों का वर्णन करें

Q. माया सभ्यता के विस्तार एवं सांस्कृतिक उपलब्धियों का वर्णन करें

Q. एजटेक सभ्यता के विस्तार एवं उपलब्धियों की विवेचना करें

Q. अमरीका में एज़टेक एवं इंका सभ्यता का विनाश कैसे हुआ? वर्णन करें

दूसरा उतर 

समुद्री गार्यों की खोज ने आदिवासी जनजातियों पर कई अत्याचार किए। उन्हें उनके अपने क्षेत्रों से बेदखल कर दिया गया और उनकी संस्कृति को नष्ट कर दिया गया, जिससे वे सामाजिक और आर्थिक रूप से अत्यंत प्रभावित हुए।

तीसरा उतर 

जब यूरोपीय खोजकर्ता अमेरिका पहुंचे, तो उन्होंने स्थानीय जनजातियों को गुलाम बना लिया। उनकी भूमि पर कब्जा कर लिया और उनकी जीवनशैली को पूरी तरह बदल दिया, जिससे उनके अस्तित्व पर संकट आ गया।

चौथा उतर 

समुद्री गार्यों की खोज ने नए क्षेत्रों की खोज की और वैश्विक व्यापार को बढ़ावा दिया। हालांकि, इस दौरान उत्पन्न अमानवीय परिस्थितियाँ और स्थानीय जनजातियों का शोषण गंभीर समस्याएँ बनीं, जिनकी अनदेखी नहीं की जा सकती।

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